Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 7 · · Verse 2
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

वधूप्रवेश का मुह॒त्तं श्रुवक्षिप्रमृदुओोत्रवसुमुलमघानिले । वधूप्रवेश: सदन्नेष्टो रिक्ताराक बुधे परे: ॥ २॥ अन्वयः--भुवक्षिप्रमुदुश्नोत्रवसुमूलमघा निले वधूप्रवेश: सत्‌ रिकक्‍तारार्क नेष्ट:, परे: बुधे अपि नेष्ट: ॥ २ ॥। रोहिणी, तीनों उत्तरा, अछ्विनी, पुष्य, हस्त, चित्रा, अनुराधा, मृगशिरा, श्रवण, धनिष्ठा, मूल, मघा और स्वाती नक्षत्र में किया हुआ वधृप्रवेश शुभ होता है । चौथि, नवमी और चतुर्दशी तिथि में; रविवार और मंगलवार में तथा कुछ आचार्यों के मत से बुध दिन में भी अशुभ होता है ॥ २॥

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