Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
विवाह होने के बाद पहिले ज्येष्ठ में यदि स्वामी के घर में स्त्री रहे तो स्वामी के ज्येष्ठ भाई को, पहिले मलमास में स्वामी को, पहिले आषाढ ़ में सासु को, पौष मास में ससुर को, पहिले क्षयमास में अपनी देह को और पिता के घर में यदि पहिले चैत्र में रहे तो पिता को नष्ट करती है, अर्थात् विवाह के बाद पहिले ज्येष्ठ, मलमास, आषाढ़, पूस और क्षयमास में स्त्रियों को मुह॒त्तंचिन्तामणि १६० पिता के घर में और पहिले चेत्र मास में पति के घर में रहना चांहिए | जिन महीनों में जहाँ रहने से जिन लोगों को दोष कहा है, उस स्त्री के यदि वे लोग जीवित न हों तो उन महीनों में वहाँ रहने का कोई दोष नहीं हैं ।। ३ ॥।
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