Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
विचंत्रनश्नतमासादो विभौमास्ते विभूमिजे। छुरिकाबन्धन शस्तं नृपाणां प्राग्विवाहतः ॥ ५९ 0 अन्बयः--विचेत्रव्रतमासादो,विभौमास्ते, विभूमिजे, नृपाणां विवाहतः प्राक् छरिकाबन्धनं शस्तम् ॥ ५दे ॥ चैत्रमास; मंगल, बृहस्पति, शुक्र काअस्तकाल और मंगल दिन को छोड़कर यज्ञोपवीत में कहे हुए मास, पक्ष, तिथि, नक्षत्र, वार लग्नादिं में क्षत्रियों कोविवाह से पहिले छरिकाबन्धन शुभ होता है ॥ ५९॥
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