Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 5 · · Verse 31
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

पत्चमासाधिके मातुगंर्भ चौल॑ शिक्षोन सत्‌ । पत्च वर्षाधिकस्येष्ट गर्भिण्यामपि मातरि ॥ ३१॥ अन्वयः--पञ्चमासाधिके मातुः गर्भे शिशो: चौल॑ न सत्‌ । पञ्चवर्षाधिकस्य शिशो: मातरि गर्भिण्यां अपि चौल इष्टं स्थात्‌ ।। ३१ ॥। यदि माता के पाँच महीने से अधिक दिनों का गर्भ हो तोबालक का मुण्डन शुभ नहीं होता और यदि पाँच वर्ष सेअधिक दिनों का बालक हो गया हो तो माता के गर्भवती रहते भी मुण्डन शुभ होता है ॥ ३१॥।

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