Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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अन्वयः--तस्मिन् काले तत्पुरस्तात् वस्त्र शस्त्र पुस्तक लेखनीं स्वर्ण रौप्यं च स्थापयेत् । बाल: यत् गृहणाति ते: आजीवे: तस्य वृत्ति: प्रदिष्टा ॥ २२ ।। बालक को भूमि में बेठाकर उसके आगे वस्त्र, शस्त्र, पुस्तक, लेखनी, सुवर्ण और चाँदी धरे । वह बालक पहिले जिस वस्तु को उठावे उसी वस्तु के द्वारा उसकी जीविका पण्डितों ने कही है ॥| २२ ॥।
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