Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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दुष्टे योगे हेम चन्द्रे च शद्भूं धान्यं तिथ्यद्धें तिथौ तण्डुलांबच । बारे रत्नं भेचगांहेम नाड्यां दद्यात्सिन्धृत्थंचतारासु राजा॥ १८॥ अन्वयः--योगे दुष्ट हेम, चन्द्रे दुष्ट शद्धं, तिथ्य्ें धान्यं, तिथौ तण्ड्लानू, वारे रत्नं, भे गां, नाड्यां हेम, तारास [दुष्टासु |राजा सिन्धूृत्यं दद्यात् ॥ १८ ॥ यदि किसी आवश्यक यात्रादि काल में दुष्ट योग हो तो सुवर्ण, चन्द्रमा अशुभ हो तो शंख, करण दुष्ट हो तो धान्य, तिथि दुष्ट हो तो चावल, वार दुष्ट हो तो रत्न, राशि दुष्ट हो तो गौ, नाड़ी अर्थात् मुह्रत्ते दुष्ट हो तो सुवर्ण और तारा दुष्ट हो तो सेंघानमक देकर राजा यात्रादि करे ॥ १८॥
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