Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
सूर्यारसौम्यास्फुजितोक्षनागसप्ताद्रिघस्रनानविधुरग्निनाडी । तमोयमेज्यास्त्रिससाश्विमासान् गन्तव्यराशे: फलदाः पुरस्तात् ॥ १७॥ अन्वयः--सूर्या रंसौम्यास्फुजित: गन्तव्यराशेः पुरस्तात् (क्रमेण) अक्षनागसप्ताद्रिघस्नान् फलदाः, विधु: अग्निनाडी: फलदा: (फलद:) तमोयमेज्या: (क्रमेण) त्रिरसाश्विमासान् ।। १७ ।। सूर्य अगली राशि में जाने से पाँच दिन पहले, मंगल आठ दिन, बुध सात दिन, शुक्र सात दिन, चन्द्रमा तीन दण्ड, राहु तीन मास, शनेरचर छः: मास और बृहस्पति दो मास पहले उस राशि का फल देने लगते हैं ॥ १७ ॥।
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.