Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 4 · · Verse 15
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अ्रवासनाशौ मरणं जयहुच हास्यारतिक्रीडितसुप्तभुक्ताः । ज्वराख्यक म्पस्थिरता अवस्था मेषात्क्रमान्नामसद्कफला:स्यु:॥ १५॥। अन्वय:--प्रवासनाशाौ मरणं जथः हास्यारतिक्रीडितसुप्तभुक्ता: ज्वराख्यकम्प-स्थिरता: (एता:) मेषात्‌ क्रमात्‌ नामसदुकूफला अवस्था: स्य॒: ॥ १५॥ प्रवास, नाश, मरण, जय, हास्या, रति, कीड़ा, सुप्त, भुक्त, ज्वर, कम्प स्थिरता ये उक्त अवस्थाओं के नाम हैं । ये मेषादि क्रम से अर्थात्‌ चन्द्रमा मेष में हो तो प्रवासादि क्रम से, वृष में हो तो नाशादि क्रम से, मिथुन में हो तो मरणादि क्रम से, कक में हो तो जयादि क्रम से, सिंह में हो तो हास्यादि क्रम से, कन्या में हो तो रत्यादि क्रम से, तुला में हो तो क्रीड़ादि क्रम से, वृश्चिक में हो तो सुप्तादि क्रम से, धन में हो तो भुक्तादि क्रम से, मकर में हो तो ज्वरादि क्रम से, कुम्भ में हो तो कम्पादि क्रम से और मीन में हो तो स्थिरतादि क्रम से होती हैं। इनका फल इन्हीं नामों के समान होता है ।॥ १५॥।

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