Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
अश्विन्यादि व्यतीत नक्षत्रों कीसंख्या को साठ से गुणा करके वत्तंमान नक्षत्र की भुक्त घटी जोड़े ।फिर उसे चार से गुणा करे और पेंतालिस का भाग दे । जो लब्ध हों वे मेषादि राशियों में स्थित चन्द्रमा की भुक्त अवस्था होगी और शेष वर्त्तमान अवस्था होगी और यदि लब्ध बारह से अधिक हों तो उनमें बारह का भाग देकर जो शेष रहें वह भक्त अवस्था होगी ।। १४ ॥।
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