Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 2 · · Verse 9
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

अन्वयः--मूलाहिमिश्रोग्रं अधोमु्‌ख॑; आद्रेंज्यहरित्नयं श्रुवं ऊर्ध्वास्यं, मैत्नकरानिलादितिज्येष्ठाश्विभानि तिय॑ड्मुखं भवेत, एबु ईदृशक॒त्यं सत्‌ ॥ & ।। मूल, आइ्लेषा, मिश्रसंज्ञक और उग्रसंज्ञक की अधोमुख संज्ञा है । आर्द्रा, पुष्य, श्रवण, धनिष्ठा, शतभिष, और भ्रुवसंज्ञक नक्षत्रों कीऊध्व॑मुख संज्ञा है । मृदुसंज्ञक नक्षत्र, हस्त, स्वाती, पुनर्वंसु, ज्येष्या और अश्विनी की तिर्यडःमुख संज्ञा है। इन्हीं संज्ञाओं केसदृश काय इनमें शुभ होते हैं, अर्थात्‌ अधोमुख संज्ञक नक्षत्रों में कुँआ, बावली तालाब खोदवाना इत्यादि, ऊध्वेमुख नक्षत्रों में राज्याभिषेक, पट्टबन्ध, दुमहला, तिमहला आदि मकान बनवाना और तियंडः मुख नक्षत्रों में हाथी, घोड़े, बेल आंदि के कृत्य और यात्रा इत्यादि शुभ हैं ॥| ९॥

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