Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
अन्वयः--मूलेन्द्राहिभ॑ तथा सौरिः, तीक्ष्णं, दारुणसंज्ञंकं (च ज्ञेयम) । तत्र अभिचारघातोग्रभेदा: पशुदमादिकं (सिद्ध्यति ) ।। ८ ॥। मूल, ज्येष्ठा, आर्द्री, आइलेषा, ये चार नक्षत्र और शनेहचर दिन, इनकी तीक्षण और दारुण संज्ञा है। इनमें अभिचार, म्रारण आदि भयानक कर्म, भेद और हाथी-घोड़े आदि का सिखाना, ये कार्य-सिद्ध होते हैं ।। ८ ॥।
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