Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
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Hindi
मूल नक्षत्र केपहिले चरण में जन्म होने से पिता का नाश, दूसरे चरण में माता का और तीसरे चरण में धन का नाश होता है। चौथा चरण शुभदायक होता हैऔर शान्ति करने से चारों चरणों में शुभ ही होता है। आश्लेषा में इससे विपरीत अर्थात् आइ्लेषा के चोथे चरण में यदि किसी का जन्म हो तो उसके पिता का, तीसरे चरण में माता का और दूसरे चरण में धन का नाश होता है तथा पहिला चरण शुभदायक है ॥| ५४॥।
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