Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi
ज्येष्ठा नक्षत्र केअन्त की चार घड़ी और मूल नक्षत्र केआदि को चार घड़ी अभक्त मूल हैं, यह नारदजी कहते हैं । ज्येष्ठा केअन्त की एक घड़ी और मूल के आदि की दो घड़ी अभुक्त मूल हैं, यह वसिष्ठजी ने कहा है। ज्येष्ठा केअन्त की आधी घंड़ी और मूल के आदि की आधी घड़ी अभुक्तमूल है, यह बृहस्पतिजी ने कहा है।। ५२ ॥
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.