Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 2 · · Verse 23
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

विनष्टाथ्थस्यथ लाभो5न्धे शीघ्र मन्‍्दे प्रयत्नतः । स्थाददूरे श्रवर्ण मध्ये श्रुत्याप्ती न सुलोचने ॥ २३ अन्वयः--अन्धे विनष्टार्थस्य शीघ्र लाभः, मन्दे प्रयत्न:, मध्ये दूरे श्रवर्ण स्थात, सलोचने श्र॒त्याप्ती न ॥ २३ ॥। यदि अन्धाक्षसंज्ञक नक्षत्रों मेंकोई वस्तु चोरी जाय तो ज्षीघ्र मिले मन्दाक्षसंज्ञक नक्षत्रों में बड़े उपाय से मिले, मध्याक्षसंज्ञक नक्षत्रों में दूर में सुन पड़े मिले नहीं, और सुलोचन संज्ञक में तो कुछ भी पता न लगे ॥ २३॥।

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