अधमं तिथियाँ और दंतुन करने का निषेध षष्ठ्यादितिथयो मन्दाद्विलोम॑ प्रतिपद्बुध । सप्तम्यक धमाः षष्ठ्याद्यामाइच रदधावने ॥ ६ ॥। अन्वय:--मन्दात् विलोम॑ षष्ठ्यादितिथय:, बुध -प्रत्रिपत्, अर्के सप्तमी, (अधमाः ) च (पुनः) रदधावने षष्ठ््याद्यामा: अधमा: ॥ ६ ॥ दनैदचर से लेकर उलटें क्रम सेरविवार तक षष्ठी सप्तमी आदि सीछे क्रम से अधम संज्ञक होती हैं, अर्थात् शनेइचर को षष्ठी, शुक्रवार को सप्तमी; बृहस्पति को अष्टमी, बुधवार को नवमी, मंगल को दह्ममी, सोमवार को एका- दशी, रविवार को द्वादशी ये अधम संज्ञक हैं। इसे क्रकच योग कहते हैं । और बुधवार को प्रतिपदा तथा रविवार को सप्तमी भी अधम हैं। इसे संवर्तंक योग कहते हैं । इनमें कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए । षष्ठी, प्रतिपद' और अमावस ये तिथियाँ दंतून करने में निषिद्ध हैं अर्थात् इनमें दंतून न करना चाहिए ॥ ६॥।
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