Muhūrta Cintāmaṇi
Chapter 1 · · Verse 57
Sanskrit · DevanāgarīMuhūrta Cintāmaṇi manuscript tradition
Translations
Hindi

बाहुलराधयोम॑दनदर्शों गोपनी. इति मुहत्तचिन्तामणों शुभाशुभप्रकरणं समाप्तम्‌ ॥ ११ चैत्र में तीन तिथियाँ, माघ में एक तिथि, कार्तिक में दिशा (दश) तिथियाँ, ज्येष्ठ में अन्त्य (अन्तिम) तिथि, आषाढ़ में नव, फाल्गुन और अश्विन में शुभ; भाद्रपद में अग्नि (तीन) शुक्ल पक्ष, कार्तिक-श्रावण (अमाष्ट) कृष्ण पक्ष में युगादि — ये सन्वाद तिथियाँ हैं। वैशाख, भाद्रपद और माघ के शुक्लपक्ष में युगादि तिथियाँ हैं । इति मुहूर्तचिन्तामणि में शुभाशुभप्रकरण समाप्त ॥

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