Bṛhat Parāśara Horā Śāstra
Chapter 60 · atha śukrāntardaśāphalādhyāyaḥ · अथ शुक्रान्तर्दशाफलाध्यायः · Verse 35
Sanskrit · DevanāgarīBṛhat Parāśara Horā Śāstra manuscript tradition
व्यवसायात्फलं नेष्टं ग्रामभूम्यादिहानिकृत् ।
द्वितीयद्यूननाथे तु देहवाधा भविष्यति
IAST Transliteration
vyavasāyātphalaṃ neṣṭaṃ grāmabhūmyādihānikṛt | dvitīyadyūnanāthe tu dehavādhā bhaviṣyati
TranslationsTwo-source verified
English

Physical distress, losses in profession, loss of village, land etc., will be the results, if Mars be the lord of the 2nd or the 7th from the Ascendant.

Hindi

तथाष्टमे व्यये वापि दायेशाद्‌ वा तथेव च ।।31।। शीतज्वरादि पीडा च पितृमातृ भयावहा । ज्वराद्यधिकरोगाश्च स्थानभ्रंशो मनोरुजा ।।32।। स्वबन्धुजनहानिश्च कलहो राजविग्रहः । राजद्वारजनद्वेषी धनधान्यव्ययोऽधिकः ।।33।। व्यवसायात्फलं नेष्टं ग्रामभूम्यादिहानिकृत्‌ । दवितीयद्यूननाथे तु देहबाधा भविष्यति ।।34।। दोषस्य परिहारार्थं भौमशान्तिं चरेद्‌ बुधः । अनड्वाहं प्रदद्यात्तु भैरवस्यार्चनं चरेत्‌ ।।35।। यदि मंगल लग्न या दशापति से 8.12 भाव में हो तो शीत ज्वर पीडा, माता-पिता को कष्ट, अधिक रोग, मनोविकार के कारण स्थान हानि (उच्चाटन), अपने लोगों की हानि, कलह, सरकारी आदमियों से विरोध, राजद्वार में विरोध, धन का अधिक व्यय, व्यवसाय से कम लाम, ग्राम या भूमि आदि की हानि होती है। यदि मंगल 2.7 भावेश हो तो शरीर कष्ट होता है। शान्ति के लिए मंगल दान, पूजन, भैरव पूजन या हनुमान्‌ पूजन तथा वृषदान करना चाहिए ।

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse