The rasi which is auspicious in the Ashtakavarga Samudaya is considered auspicious for all auspicious functions. Consequently the auspiciousness of the Ashtakavarga should be got checked before performing any function like marriage etc. If a rasi is not auspicious in the Ashtakavarga, then its auspiciousness should be checked from transit effects. It is not necessary to check transit effects if a rasi is auspicious in the Ashtakavarga. Thus the auspiciousness of the rasi in the Ashtakavarga should be considered as paramount.
सप्तेन्दुभिर्व्याधिभयं दद्याद् धेनुं गुडं तथा । कलहोऽष्टेन्दुभिर्दद्याद् रत्नगोभूहिरण्यकम् । । 31 । । अङ्केन्दुभिः प्रवासः स्याच्छान्तिं कुर्यद्यथाविधि । विंशत्या बुद्धिनाशः स्यात् गणेशं तत्र पूजयेत् । । 32 । । रोगपीडैकविंशत्या दद्यादन्नस्य पर्वतम् । यमाश्विभिर्बन्धुपीडा दद्याद्वादशकं द्विज ! । । 33 । । त्रयोविंशतिसंयुक्ते मासे क्लेशमवाप्नुयात् । सौवर्णी प्रतिमां दद्याद् रवेः सप्तपलैर्विधः । । 34 । । 17 रेखा वाले मास में रोगभय, तदर्थ गाय व गुड़ का दान करें । 18 रेखा से कलहागम होता है । तदर्थ रत्न, गाय व सोने का दान करें । 19 रेखा से प्रवास होता है । अतः यथाविधि शान्ति करें । 20 रेखा से बुद्धिनाश होता है, अतः गणेश की पूजा करें । 21 से रोग होता है, अतः अन्नपर्वत का दान करें । 22 से बन्धुबान्धवों को पीड़ा होती है, अतः दस धेनु दान या मात्र वास्तविक गोदान करना चाहिए । 23 रेखायुक्त मास में क्लेश होता है, अतः सूर्य की 7 पल निर्मित सुवर्ण प्रतिमा का दान करें ।
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