The rasi which is auspicious in the Ashtakavarga Samudaya is considered auspicious for all auspicious functions. Consequently the auspiciousness of the Ashtakavarga should be got checked before performing any function like marriage etc. If a rasi is not auspicious in the Ashtakavarga, then its auspiciousness should be checked from transit effects. It is not necessary to check transit effects if a rasi is auspicious in the Ashtakavarga. Thus the auspiciousness of the rasi in the Ashtakavarga should be considered as paramount.
अभिशापभयं तत्र रेखा रुद्रसमा द्विज ! । दिक्पालस्वर्णघटितां प्रदद्यात् प्रतिमां विधोः । । 26 । । युक्ते द्वादश रेखाभिर्जले मृत्युभयं वदेत् । सशस्यभूमिं विप्राय दत्त्वा शुभं फलं भवेत् । । 27 । । विश्वप्रमितरेखाभिर्व्याघ्रान्मृत्युभयं भवेत् । विष्णोर्हिरण्यगर्भस्य दानं कुर्याच्छुभाप्तये । । 28 । । शक्रप्रमितरेखाभिर्युक्ते मासे मृतेर्भयम् । वराहप्रतिमां दद्यात् कनकेन विनिर्मिताम् । । 29 । । तिथिभिश्च नृपाद्भीतिर्दद्यात् तत्र गजं द्विज ! । रिष्टं षोडशभिर्दद्यात् मूर्तिं कल्पतरोस्तथा । । 30 । । 11 रेखा वाले मास में बहुत कष्ट का योग होता है । तब 10 पल सोने से निर्मित चन्द्र प्रतिमा का दान करें । 12 रेखा वाले मास में जल से मृत्युभय होता है, तब खड़ी फसल से युक्त भूमि का दान करना चाहिए । 13 रेखा वाले मास में व्याघ्रादि जंगली जन्तुओं से भय होता है । तच्छान्त्यर्थ विष्णु भगवान् की प्रतिमा (शालिग्राम) का दान करना चाहिए । 14 रेखा वाले मास में मृत्युभय होता है । तब सुवर्णनिर्मित वराह भगवान् की प्रतिमा का दान करना चाहिए । 15 रेखा मास में राजभय होता है, तदर्थ हाथी का दान करें । 16 रेखा वाले मास में अरिष्ट होता है, तदर्थ कल्पवृक्ष की सुवर्ण या रजत प्रतिमा का यथाशक्ति दान करें ।
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.