Loss of wealth, anxiety, enmity with kinsmen and distress to brother, will be the results, if the Moon be in the 6th, the 8th or the 12th from the lord of the Dasa (Ketu). If Moon be the lord of the 2nd, the 7th or the 8th, there will be fear of premature death.
दायेशात्षष्ठरिःफे वा रन्ध्रे वा बलवर्जिति । धनधान्यादिहानिश्च मनोव्याकूलमेव च ।।33।। स्वबन्धुजनवैरं च आंत्रपीडा तथैव च । निधनाधिपदोषेण मारकेशेन संयुते ।।34।। अपमृत्युभयं तस्य शान्तिं कुर्याद्यथाविधि । चन्द्रप्रीतिकरं चैव ह्यायुरारोग्यसिदधये ।।35।। दशेश से 6.8.12 में चन्द्रमा हो, या बलहीन हो तो धनधान्यादि हानि, मन में व्याकुलता, अपने बन्धुओं से वैर, आंत्र को पीडा होती है । यदि चन्द्रमा अष्टमेश या 2.7 भावेश से युक्त हो तो अपमृत्यु का भय होता है। इसकी विधि के अनुसार शान्ति करनी चाहिए । शान्त्यर्थं चन्द्रमा का दान, जप आदि करें ओर देवी जप या पाठ आदि भी करें ।
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