The effects like gains of wealth, beneficence of the king, performance of pious deeds and fulfilment of all ambitions, will be derived in the Antardasa of the Sun in the Dasa of Ketu. If the Sun be in his sign of exaltation, in his own sign or be associated or aspected by a benefic in kendra trikona or the 11th.
अष्टमव्ययराशिस्थे पापग्रहसमन्विते । तदभुक्तौ राजभीतिश्च पितरमातृवियोगकृत् ।।17।। विदेशगमनं चैव चौराहिविषपीडनम् । राजमित्रविरोधश्च राजदण्डाद् धनक्षयः ।।18।। शोकरोगभयं चैव तापाधिक्यं ज्वरो भवेत् । यदि सूर्य जन्मलग्न से 8.12 राशि भाव में हो अथवा पापग्रह से युक्त हो तो इस अन्तर्दशा में राजा से भय, माता-पिता का वियोग, विदेशगमन, चोर, सर्पं व विष से पीडा, राजा व मित्रों से विरोध, राजा द्वारा निर्धारित दण्ड को भोगने के निमित्त धन व्यय, धन हानि (आर्थिक दण्ड), शोक के अवसर, रोगमय, अधिक मनःसंताप, ज्वरादि रोगों से पीडा आदि अशुम फल होते हैं ।
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.