Details (of astronomical nature) of stars be understood by general rules while I narrate to you about the effects of planets and signs.
पराशर बोले — विप्रवर! अब मैं आकाश में नक्षत्रों व ग्रहों की स्थितियों को बताता हूँ। आकाश में जितने ज्योतिर्बिम्ब (तारे आदि) दिखते हैं, उनमें से कुछ का नाम 'नक्षत्र' है तथा कुछ को 'ग्रह' कहते हैं। जिनका स्थान सदैव स्थिर है (परस्पर अन्तर समान रहता है) — उन्हें नक्षत्र कहते हैं। जो ज्योतिः-पिण्ड आकाश में सदैव परिक्रमण करते हुए नक्षत्रों को पार करते जाते हैं — वे 'ग्रह' कहलाते हैं। भचक्र (नक्षत्र-चक्र) का 27वाँ भाग = 13°20' एक नक्षत्र है — उन भागों के नाम क्रमशः अश्विनी आदि सत्ताईस नक्षत्र हैं। यदि भचक्र के 12 भाग कर दिए जाएँ (30° का एक भाग) — वे क्रमशः मेषादि राशियाँ हैं। सूर्यादि नौ ग्रह प्रसिद्ध हैं। राशियों का उदय होना ही 'लग्न' है — उसी उदय-लग्न में स्थित ग्रहों की युति-योग का विचार करके मनुष्यों का शुभाशुभ फल जानना चाहिए।
Nakshatra groupings from general shastras; this text declares rashi/graha phala.
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