Vivāha Vṛndāvana
Chapter 16 · Vamsha Varnana (Description of the Author's Lineage) · Verse 4
Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
Translations
Hindi

जिन्होंने बहुत ग्रन्थों को नहीं देखा उन (अल्पज्ञों) के लिये यह गुणविशिष्टमी विवाहवृन्दावन है तो क्या? कुछ भी नहीं — अर्थात् वे लोग इसे तुच्छ समझेंगे। तथा जो अबुद्धि (कुछ भी ग्रन्थ नहीं देखे) हैं वे इसे पदों से गम्भीर समझकर ही आनन्द को प्राप्त होंगे। तथा शास्त्रों में विशदबुद्धिवालों के तो एकबार कर्णगोचर होते ही यह (विवाहवृन्दावन) उनकी जिह्वा पर जाकर वृद्धि को प्राप्त होगा ॥ ४ ॥

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