Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
जैसे नदी के किनारे पर लटकता हुआ तृणों का गुच्छा चालन नहीं सह सकता है, उसी प्रकार विवाह के फल समूह भी तर्क से चालित (अन्यथाकरण) नहीं सह सकता है। अर्थात् यह आगमसिद्ध विवाहफल में तर्क से अन्यथा अर्थ करना उचित नहीं है। इसलिये परमत रूप आतप से पीड़यमान लोगों का अवन (रक्षण) है जिससे ऐसे वृन्दावन नामक इस ग्रन्थ में पण्डितों की बुद्धि सम्पत्ति यथेच्छ विहार करे ॥ ७ ॥
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