Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
चन्द्रविमण्डल (चन्द्रमार्ग) और क्रान्तिमण्डल (सूर्यमार्ग) इन दोनों वृत्त का योग ही पात कहलाता है, इस प्रकार गोलज्ञाताओं ने कहा है। उसी में सर्वदा स्थित राहु अमृत, स्नान, दान, और हवन के अंश की लालसा से अपने समीप में आते हुए चन्द्रमा को देखता रहता है ॥ ४ ॥
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