Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
'यद्यपि राहु छादक है' यह केवल वासना से सिद्ध नहीं होता है। नहीं हो, यह तो हमारा इष्ट ही है, क्या वासना से सिद्ध बिना देवता का अहोरात्र आप सूर्य के सौम्यायन और याम्यायन से ही नहीं स्वीकार किया है? अवश्य किया है। अर्थात् जैसे संहिता स्मृति आदि से सूर्य के अयन से ही देवता का अहोरात्र मानते हैं तो उसी प्रमाण से राहु को भी ग्रहण में छादक मानें ॥ १८ ॥
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