Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
Translations
Hindi
ग्रह प्रतिदिन चरता हुआ ही कुछ फल देता है, क्योंकि वह चारफल कहलाता है। और जिस नक्षत्र में ग्रहण होता है उसी नक्षत्र में राहु भी रहता है तो क्या वह नहीं चलता है? अवश्य चलता है। यदि नहीं चलता तो कुछ ग्रहण ही चलता है? भाव यह है कि एक ग्रहण जिस नक्षत्र में होता है फिर दूसरा ग्रहण उससे पीछे के अन्य नक्षत्र में होता है। अतः ग्रहण की गति ही राहु की गति सिद्ध होती है, अतः राहु में ग्रहत्व सिद्ध है ॥ १५ ॥
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.