Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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अगर फल देने में उच्च पृथक् पृथक् हो तो, शनि, मंगल और गुरु इन तीनों का उच्च सूर्य ही को क्यों मानते? इसलिये मन्दफलादि साधनार्थ उच्च कल्पना मात्र है। तथा यह भी कि उच्च का फल कहने वाला कोई आचार्य सुनने में नहीं आया है। अर्थात् सिद्ध हुआ कि पात में फलदातृत्व है, उच्च में नहीं ॥ १३ ॥
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