Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
वृष और मीन गैर-द्विपद की राशि होने पर भी द्विपद नहीं हैं — इसलिये अग्राह्य है, ऐसा कहा जाय तो — शोनक मुनि ने मीन-नवांश को क्यों ग्रहण किया? कहो कि — मीन शुभग्रह की राशि है और उससे सप्तम द्विपद (कन्या) का नवांश होता है इसलिये ग्राह्य है, तब तुला क्या होगा? तुला से सप्तम-नवांश मेष का है वह तो न शुभग्रह है न द्विपद है तो फिर तुला क्यों ग्राह्य हुआ?
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