Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
चतुर्थेश आदि सुखकारक ग्रह निर्बल हो तो जन्मलग्न-जन्मराशि से चतुर्थ राशि विवाहलग्न में सुखनाशकारक होता है। तथा जन्मलग्न या जन्मराशि से द्वादशराशि विवाहलग्न में पड़े और यदि द्वितीयेशादि धनकारक ग्रह पुष्ट-बली हो तो व्यय को भंग करनेवाला होता है। और धनकारक ग्रह निर्बल हो तो व्ययकारक ही होता है।
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