Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
चलते और लौटते हुए नेत्र प्रान्तों की शोभा है जिसमें ऐसा श्री (लक्ष्मी) और नारायण का प्रथम समागम आप लोगों के क्लेश को दूर करे। जिस नव समागम में लक्ष्मीजी के स्तन हारस्थित मणि के रश्मि (किरण) और भगवान् नारायण के कौस्तुभमणि के किरण, इन दोनों का गुम्फ (परस्पर मिलन) ही ने अञ्चलग्रथन (गाँठ बन्धन) रूप मङ्गलाचरण किया।
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