Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
सुवासिनी स्त्री सहित कन्या शौनकादिकथित विधि से शची की पूजा करे। और गौरी आदि षोडशमातृका तथा माता मातामही आदि माताओं का यज्ञ (पूजनादि) तथा कुलाचारानुसारशान्ति (कुलदेवतापूजनादि) ये अविघ्न (निर्विघ्न निष्पादित) मातृयज्ञ अशुभ को नाश कर देते हैं। इसलिये इन कर्मों को मंगलकार्य में अवश्य करना चाहिये ॥ ३२ ॥
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