Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
Translations
Hindi
अनामिका अंगुली मूल को विभूषित करने वाली (अर्थात् अनामिका के मूल और आयुरेखा पर्यन्त खड़ी) रेखा पुण्य रेखा कहती है, वह पुण्य कराने वाली होती है। और जो रेखा मणिबन्ध से निकल कर समस्त हस्ततल को विभक्त करती हुई ऊपर को जाती है वह ऊर्ध्व रेखा किस को राज्य नहीं कराती, अर्थात् इस प्रकार की ऊर्ध्व रेखा हाथ में हो तो अवश्य राज्यप्रद होती है ॥ २३ ॥
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.