Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
मंगल विवाहलग्न से ३, ११, ६ में वृद्धिका होता है। और ८, १, ७ में मरणकारक होता है। यदि १० स्थान में हो और उस पर गुरु की दृष्टि न हो तो वह स्त्री अनीति करने वाली और अपने सन्तान को नाश करनेवाली होती है। यदि बृहस्पति की दृष्टि हो तो शुभफल समझना।
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