Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
Translations
Hindi
२७८, २९९, ३२३ ये क्रम से लंकोदयपल हैं, इनमें क्रमशः उपरोक्तरीति से साधित चरखण्डों को घटाना, फिर लंकोदय को विलोमविधि से रखकर उनमें उत्क्रम से चरखण्डों को जोड़ना तो ये मेषादि ६ राशियों के उदयपल होते हैं। फिर यही उलटे क्रम से तुलादि ६ राशियों के स्वदेशोदयपल होते हैं ॥ ९ ॥
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.