Sanskrit · DevanāgarīVivāha Vṛndāvana manuscript tradition
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Hindi
जिसको पापग्रह छोड़ दिया हो, जिसमें जानेवाला हो और जिसमें वर्तमान हो ये तीन नक्षत्र, मंगल जिस नक्षत्र में हो उससे तीसरा, शनि से आठवाँ, सूर्य से १२वाँ और राहु से २०वाँ ये ४ नक्षत्र, तथा त्रिविध उत्पातयुक्त नक्षत्र, ये सब नक्षत्र चन्द्रमा के दो वार भोग करने से पूर्व अशुभ हैं। अर्थात् यदि चन्द्रमा इन नक्षत्रों को दो वार भोग करले तो शुभ हो जाता है ॥ २ ॥
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