HomeLibrarySaravaliCh.35Verse 5
Sārāvalī
Chapter 35 · Raja Yogas · राजयोगात्यायो नाम पञ्चत्रिशः ॥ SON · Verse 5
Sanskrit · DevanāgarīSārāvalī manuscript tradition
नीच कुलोत्पन्न राजयोगों के ३२ भेद
स्वोच्चस्थे रविभौमसौरगुरुभिः सर्वे स्त्रिभिशचेकगे-
ल॑ग्ने षोडश वृद्धतापसगणेः सन्दशिताः पार्थिवाः ।
द्वाभ्यां चेकतमोदये स्वभवने चन्द्रे पुनः षोडश
सर्वो नीचकुलो-द्भवोऽपि वसुधां *पात्येव वाटीमिव
Translations
English

If all the four of the Sun, Mars, Saturn and Jupiter, or three of them, be exalted and one of them be simultaneously in the Ascendant, a total of 16 kinds of Raja Yogas are formed. One born even in a mean caste with such a Yoga will become a ruler. Again a different group of 16 Raja Yogas are formed, if one, or two out of the above four planets are in exaltation, while one of the exalted planets occupies the Ascendant, as the Moon remains in Cancer. According to great sages, these 32 Yogas will make one a ruler, who reigns the whole earth, as though it is just a garden.

Hindi

यदि कुण्डली में सूय-भौम-शनि-गुरु ये चारों उच्चराशि में हों तथा इन चारों में से एक लग्न में हो तो चार प्रकार के राजयोग होते हैं । यदि इन्हीं भौमादि चारों में से कोई तीन ग्रह उच्चराशि में हों तथा इन्हीं तीनों में से एक ग्रह ग्रह लग्न में हो तो बारह प्रकार के राजयोग होते हैं । इस प्रकार सोलह योग होते हैं। पूर्वोक्त भौमादि ग्रहों में से यदि दो ग्रह उच्च में हों और दो में से एक लग्न में एक चन्द्रमा स्वगृह अर्थात्‌ कक राशि में हो तो बारह प्रकार के राजयोग होते हैं। यदि भौमादि दो में से एक ग्रह उच्च राशि में लग्नगत हो तथा कर्क राशिका चन्द्रमा हो तो चार प्रकार के राजयोग इसलिए सोलह + सोलह बत्तीस भेद होते हैं । इन सब बत्तीस योगों में नीच कुल म उत्पन्न पुरुष भी राजा होता हैं, तथा एक बगीचे की तरह पृथ्वी का पालन करता ही हे । ऐसा कथने वृद्ध तपस्वी गण का हैं, अर्थात्‌ वृद्धाचार्यो का है । विज्षेष--पाठकों की सुविधा के लिए ३२ भेदों का वर्णन निम्न है । मेष लग्न में सूर्य कक में गुरु, तुला में शनि, मकर में मङ्गल यह एक भेद हुआ । ककं लग्न में गु की कल्पना से दूसरा । तुला लग्न में शनि की स्थिति से तीसरा एवं मकर लग्न में मङ्गल की सत्तावश चतुर्थ भेद होता है । एवं तीन ग्रहों की कल्पना से--मेष लग्न में सुर्य, कर्क में गुरु, तुला में शनि एक अर्थात्‌ ५ वाँ होता है। इसी द्रकार अन्य भेद भी होते हैं, उदाहरणार्थ सारिणो देखें

Have a question about this verse?

Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.

Ask about this verse