The fourth planet counted from the Lord of the first year rules the second year. Similar counting of fourth Lords for the subsequent years should be made to know the Lords thereof. There are 24 Horas (planetary hours) in each day (from one Sun-rise to the next). The first Hora is ruled by the Lord of the week day, while the subsequent ones are ruled by the Lords of the sixth week-days thereof. Thirty (Savana) days make one (Savana) month. To know the Lord of the week-day in particular month, the months past should be multiplied by 30, increased by one and divided by 7. The remainder represents the Lord of the week-day counted from the earlier week-day Lord.
प्रथम वर्षेश दिन से चतुथ ग्रह (सू्य-चन्द्रादि वार क्रम से) द्वितीय वर्षश होता है। पुनः द्वितीय से चतुर्थ तृतीय वर्षेश होता है । इसी प्रकार अग्निम वर्षेश का ज्ञान भी होता है । एक अहोरात्र में २४ घण्टे होते हैं ॥ १ घण्टा = १ होरा =२$ घटी । इसलिए ६० घटी = १ अहोरात्र । इन २४ होरा स्वामियों का ज्ञान प्रथम होरा स्वामी से छठे-छठे ग्रह (वार) क्रम से होता हँ । प्रथम से पष्ठ-द्वितीय, द्वितीय से षष्ठ-तृतीय, इस प्रकार आगे भी । ३० सूर्यादि (सावन) दिन का १ मास होता हे । इसलिए जिस मास के मध्य में वारेश का ज्ञान करना हो वहाँ तक चैत्र शुक्लादि से गत मास संख्या को तीस से गुणा करके गत दिन संख्या जोड़कर ७ का भाग देने पर जो शेष हो, वह सूर्यादि क्रम से दिन का स्वामी (वारेश) होता है । एवं गत दिनादि से वर्षेश का ज्ञान करना चाहिए ।। विशेष--शुभ अशवा अशुभ फल ज्ञान के लिए समय के चार भेद होते हैं--१ होरा, २ अहोरात्र (दिन रात्रि), ३ मास, ४ वर्ष । इन चारों में सूक्ष्म होरा है । क्रमशः चारों का उदाहरण -- वर्ष स्वामी जानने का उदाहरण--यदि प्रथम वर्ष का स्वामी मंगल है तो द्वितीय वर्ष का स्वामी कोन होगा । उत्तर--मंगल से चतुर्थ शुक्र है इसलिए द्वितीय वर्ष का शुक्र हुआ । एवं शुक्र से चतुर्थ चन्द्र है यह तृतीय वर्ष का स्वामी हुआ, इस प्रकार आगे भी । इसकी उपपत्ति इस प्रकार से है। १ वर्ष में ३६० दिन होते हँ । अतः द्वितीय वर्षारम्भ में ३६१ दिन होंगे ३६१ में ७ का भाग देने पर ५१ लब्धि व शेष ४ आता हे । इस कारण से द्वितीय वर्षेश चतुर्थ ग्रह (वार) निश्चित हुआ । मास स्वामी जानने का उदाहरण--माना यदि प्रथम मास का स्वामी मंगल हे तो छठे मास का स्वामी कौन होगा । उत्तर--गत मास संख्या ५ को ३० से गुणा करने पर १५० हुआ इसमें षष्ठ मास प्रथम दिन संख्या १ जोड़कर ७ का भाग देने पर २१ लब्धि व ४ शेष बचा, इसलिये मंगल से चतुर्थ शुक्र छठे मास का स्वामी हुआ । होरा स्वामी जानने का उदाहरण--मंगलवार के दिन चतुर्थ होरा का स्वामी कौन होगा । उत्तर--मंगलवार के दिन प्रथम होरा मंगल की, द्वितीय से छठी सूर्य की, सूर्य से छठी शक्र की ततीय होरा और आक्र से छठी होरा बुध की अतः चतुर्थ होरा का स्वामी बुध हुआ । सूर्य सिद्धान्त में कहा है, 'होरेशाः सूर्यतनयादधो5घः क्रमशस्तथा' (१२ अ० ७९ इलो०) ॥२-३॥
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