Venus, Mars, Saturn, Jupiter and Mercury remaining in their respective own Houses, or exaltation Signs, identical with Angles, cause Malavya, Ruchaka, Sasa, Hamsa and Bhadra Yogas, respectively. The effects thereof have been elaborately explained by the ancient preceptors, which I briefly narrate here.
यदि कुण्डली में शुक्र, भौम, शनि, गुरु, बुघ, अपनी राशि में वा उच्चराशि में बली होकर केन्द्र में (१, ४, ७, १०) स्थित हों तो मालव्य, रुचक, शश, हंस, भद्र, ये पाँच महापुरुष योग क्रम से अर्थात् यदि शुक्र अपनी राशि (तुला, वृष) में वा उच्च राशि (रीन) में स्थित होकर केन्द्र में हो तो मालव्य नाम का योग होता है । यदि भौम अपनी राशि (मेष, वृश्चिक) में वा उच्च राशि (मकर) में स्थित होकर केन्द्र में हो तो रुचक योग होता है । इसी प्रकार शनि, गुरु, बुध केन्द्रस्थ हों तो शनि वश शश योग, गुरु से हंस, बुध से भद्र योग होता है । इन पाँचों के लक्षण विद्वानों ने विस्तार पुर्वक कहे हैं, मैं संक्षेप से कहता हू
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