HomeLibrarySaravaliCh.32Verse 85
Sārāvalī
Chapter 32 · Ninth House And Effects Thereof · भाग्यचिन्ता नाम टात्रिशोऽऽ्यायः ॥ त्रयरित्रशो · Verse 85
Sanskrit · DevanāgarīSārāvalī manuscript tradition
Translations
English

One, who has the Moon, Jupiter, Mercury and the Sun in the 9B\ will be principled, steady, honoured by the king and be delighted.

Hindi

। यदि जन्म के समय लग्न में शुक्रशनि हों तो जातक--समस्त स्त्रियों के साथ रमण करने वाला, सुन्दर देहधारी, सुख-घन-भोग से युक्त, अधिक नोकर बाला व शोक से पीड़ित होता है । यदि चतुर्थ भाव में शुक्र शनि हों तो जातक--मित्ों से घन प्रात्तकर्ता, बन्धुओ से अच्छा व्यवहारी तथा राजा से श्रेष्ठता प्राप्त करने वाला होता है । र यदि सप्तम भाव में शुक्र शनि हों तो जातक- स्त्री रत्न-सुख-धन-कोति समस्त ऐश्वर्य को प्राप्त करने वाला तथा विषय प्राप्तकर्ता होता हे । यदि दशम भाव में शुक्र शनि हों तो जातक--समस्त॑ झंझटों से रहित, संसार में प्रसिद्ध, बिशेष कार्य कर्त्ता तथा राजा का बड़ा सचिव होता है । इस प्रकार मैंने केन्द्रस्थ दो-दो ग्रहों का फल कहा है, तीन, चार, पाँच, छः ग्रहों का केन्द्रस्थ ग्रहयोग फल बुद्धि से विचार कर कहना चाहिये

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