HomeLibrarySaravaliCh.32Verse 83
Sārāvalī
Chapter 32 · Ninth House And Effects Thereof · भाग्यचिन्ता नाम टात्रिशोऽऽ्यायः ॥ त्रयरित्रशो · Verse 83
Sanskrit · DevanāgarīSārāvalī manuscript tradition
मित्रेभ्यो धनलाभं बन्धुभ्यः सत्क्रियाः समाप्तोति |
ानिशुक्रयोश्चतुर्थे नृपतेशच तथाप्ततां याति
्त्रोरत्नानि सुखानि च धनानि कीति च भूतिमखिलां च ।
मन्दसितयोर्थुवत्यां प्राप्तोति पुमान्विषयलाभस्‌
सकँद्वनद्वविमुक्तो लोके ख्यातो विशिष्टकर्मा च।
मेष्रणे सिताक्योनृपतेमंन्त्री भवेदधिकः
एवं त्रिभिश्चतुभिः पञ्चभिरथ सप्तभिश्च षड्भिर्वा |
वक्तव्यं केन्द्रसथैग्रहयोगफलं विचिन्त्य धिया
Translations
English

If the Sun, the Moon, Mars and Mercury join in the 9th, one will be rich, learned, fortunate and dear to king.

Hindi

। यदि जन्म के समय लग्न में शुक्रशनि हों तो जातक--समस्त स्त्रियों के साथ रमण करने वाला, सुन्दर देहधारी, सुख-घन-भोग से युक्त, अधिक नोकर बाला व शोक से पीड़ित होता है । यदि चतुर्थ भाव में शुक्र शनि हों तो जातक--मित्ों से घन प्रात्तकर्ता, बन्धुओ से अच्छा व्यवहारी तथा राजा से श्रेष्ठता प्राप्त करने वाला होता है । र यदि सप्तम भाव में शुक्र शनि हों तो जातक- स्त्री रत्न-सुख-धन-कोति समस्त ऐश्वर्य को प्राप्त करने वाला तथा विषय प्राप्तकर्ता होता हे । यदि दशम भाव में शुक्र शनि हों तो जातक--समस्त॑ झंझटों से रहित, संसार में प्रसिद्ध, बिशेष कार्य कर्त्ता तथा राजा का बड़ा सचिव होता है । इस प्रकार मैंने केन्द्रस्थ दो-दो ग्रहों का फल कहा है, तीन, चार, पाँच, छः ग्रहों का केन्द्रस्थ ग्रहयोग फल बुद्धि से विचार कर कहना चाहिये

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