HomeLibrarySaravaliCh.32Verse 53
Sārāvalī
Chapter 32 · Ninth House And Effects Thereof · भाग्यचिन्ता नाम टात्रिशोऽऽ्यायः ॥ त्रयरित्रशो · Verse 53
Sanskrit · DevanāgarīSārāvalī manuscript tradition
नवम में सूर्य चन्द्रमा बुध युति का फल
रविचन्द्रबुघा भाग्ये क्लीबाकारं सुदुःखितं कुर्युः ।
सवंजनानां द्वेष्यं विक्रान्तं सत्यवचनं च
Translations
English

If the Sun, Moon and Mercury join in the 9th, the native will be a eunuch in appearance, be miserable, will hate all people and be valorous and truthful.

Hindi

यदि जन्म के समय भौम गरु लग्न में हों तो जातक-सचिव, प्रधान, गुणी, धार्मिक कार्यो में की प्राप्तकर्ता तथा प्रतिदिन उत्साही होता यदि चतुथं भाव में भौम-गुरु हों तो जातकत्रन्धु व मित्रों से युक्त, स्थिर चित्त (वा वित्त-धन) वाला, सुखभोगी, राजा का सेवनकर्ता व देवता एवं गुरुओ का भक्त होता है । यदि सप्तम भाव में भौम-गुरु हों तो जातक पर्वत-किला-जल-वन में घूमने वाला, अच्छे बान्धवों से युत, वीर तथा स्त्री रहित होता हैं। यदि दशम भाव में भौम गुरु हों तो जातक राजा, अधिक कीर्तिमान्‌, अधिक धन व परिवार से युत तथा चतुर होता है

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