Sanskrit · DevanāgarīSārāvalī manuscript tradition
जन्माघिपति के द्वारा शरीर पीड़ा ज्ञान
जन्माधिपतिः पापः पापक्षैं: पापयुग्वृष्ट: ।
पीडां जनयति पुंसां शुभदुष्ट्या न चातितरास् ॥१३ क॥
यदि राशीश पापग्रह हो बह पापग्रह की राशि में हो ब पाप ग्रह से दुष्ट या युत
हो तो शरीर पीड़ा देता है। यदि शुभग्रह की दृष्टि हो तो अविक पीड़ा नहीं
देता है ।
यदि लग्न में निगड़, सर्प, पक्षी, पाशघर संज्ञक द्रेष्काण पापग्रह से युत हो और
द्रेष्काणेश की दृष्टि न हो तो सप्तम वर्ष में निधन होता है ।
शरीर पीड़ा ज्ञान
लग्ने छग्नाधिपो यस्य पापयुक्तेक्षितो भवेत् ।
पीडां करोति जातस्य शुभयुग्दृष्टिताःल्पिकाम् ॥१४ क॥
१. बलिभिः ।
यदि जातक का लग्न व लग्नस्वामी पापग्रह से युत दृष्ट हो तो पीडा करता है ।
शुभग्रह की दृष्टि व युति से अल्प पीड़ा होती है ॥
शीघ्र मरण ज्ञान
पापास्त्रिकोणकेन्द्रे सौम्याः षष्ठाष्टमव्ययगतारच ।
सूर्योदय प्रसूतः सद्यः प्राणांस्त्यजति जन्तुः
Translations
English
If malefics are Angles and Trines, while benefics are relegated to 0h, 8th and 12th, one born at the time of sunrise dies at once. If the three planets, viz. the Lords of Navansa Lagna, Moon Sign and natal Ascendant, are combust, the person lives just for a few years.
Hindi
यदि सूर्योदय के समय जन्म हो और पापग्रह ५, ९, १, ४, ७, १० भाव में हों तथा शुभग्रह ६, ८, १२ भाव में हों तो जातक का शीघ्र मरण होता है
Have a question about this verse?
Ask the VedicPupil AI — trained on the complete classical corpus.