HomeLibrarySaravaliCh.11Verse 15
Sārāvalī
Chapter 11 · Evils and the Moon · चन्द्रारिष्टभङ्गो · Verse 15
Sanskrit · DevanāgarīSārāvalī manuscript tradition
शशिनो$न्त्ये बुधसितयोराये ऋरेषु वाक्पतौ गगने ।
दुरितं चातुथिकमिव नश्यति मुनिकुसुमरसनस्यैः
लग्नेश्वरस्य चन्द्रः षट्त्रिदशायहिवुकेषु शुभदृष्टः |
क्षपयति समस्तरिष्टान्यनुयाते^ नृपतिरोध इव
एको जन्माधिपतिः परिपूर्णबलः "गुभैदृष्ट: ।
हन्ति निशाकररिष्टं व्याघ्र इव मृगान्‌ वने मत्त:
Translations
English

Justas quartan fever is removed by inhaling Agashya flower, all evils are checked by Mercury and Venus in the 12th of Moon, malefics in the 11th and Jupiter in the 10th.

Hindi

यदि चन्द्रमा से बारहवें भाग में बुघ या शुक्र हों और ग्यारहवें भाव में पापग्रह हों एवं दशम भाव में गुरु हो तो अरिष्ट का नाश होता है, जैसे मुनि कुसुम (अगस्त्य पुष्प) के रस को सूँघने से कठिन चतुर्थ दिन में आने वाले रोग (उवर) का नाश होता है । यदि लग्न स्वामी से ६, ३, १०, ११, ४, में चन्द्रमा शुभग्रह से दृष्ट हो तो सब अरिष्टों का नाश होता है, जैसे राजा की सेना के पीछे चलनेवाले मनुष्य को कोई कष्ट नहीं होता है। यदि एक ही राशि स्वामी बलवान्‌, शुभग्रह से दृष्ट हो तो चन्द्रकृत अरिष्ट का नाश करता है, जैसे जंगल में उन्मत्त बाघ हरिणों का नाश करता हूँ

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