HomeLibrarySaravaliCh.9Verse 32
Sārāvalī
Chapter 9 · Conditions at Birth · सूतिकाव्यायो नवमः ॥ दशमा · Verse 32
Sanskrit · DevanāgarīSārāvalī manuscript tradition
गुरुशशिरवयो नीचे सूतौ लग्नेःथवाकसूनुरच |
लग्नोडुपभृगुपुत्रा: शुभैरदुष्टास्तथान्यजातञ्च^
Translations
English

The following lead to birth outside wedlock: Moon, or Lagna sans J u piters aspect; Luminaries being together without Jupiters aspect; Luminaries along with malefics not receiving the aspect of Jupiter; Sun, Moon and Jupiter simultaneously in fall, while Saturn is in Lagna and Lagna, Moon and Venus not being in aspect to Jupiter.

Hindi

यदि जन्म समय में लग्न व चन्द्रमा गुरु से अदष्ट हों अथवा एकराशिगत सूर्य व चन्द्रमा को गुरु न देखता हो तो, वा पापग्रह से युत सुर्य चन्द्रमा पर गुरु की दृष्टि का अभाव हो तो जातक जार से अर्थात्‌ दूसरे से उत्पन्न कहना चाहिए । यदि गुरु चन्द्रमा, सूय नीच राशि में हों अथवा शति लग्न में हो व लग्न, चन्द्रमा, शुक्र, पर शुभ ग्रह की दृष्टि का अभाव हो तब भी जातक को परजात अर्थात्‌ अन्य से उत्पन्त समझना चाहिए । 2१ अर्थ--यदि गुरु की राशि (९।१२) में चन्द्रमा हो तो, अथवा अन्य किसी राशि में चन्द्रमा गुरु से युत हो तो, अथवा गुरु के द्रेष्काण में वा नवमांश में स्थित चन्द्रमा हो तो बालक दूसरे से उत्पन्न नहीं होता है किन्तु वृहज्जातक की उत्पल टीका में यह जातः स्यात्‌ । पद्य भगवान्‌ गागि के नाम से उद्धृत हे । मनीषीगण इसका विचार करें कि किसका यह श्छोक है

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