HomeLibrarySaravaliCh.8Verse 46
Sārāvalī
Chapter 8 · Conception · आधानेऽष्टमोऽध्यायः · Verse 46
Sanskrit · DevanāgarīSārāvalī manuscript tradition
गर्माधाने चरे राशी दशमासे: प्रसूयते ।
स्थिरेणेकादशे मासे उभये द्वादशे 'भवः ।॥।४५।।
यदि आघान समय में सूर्य चर राशि में हो तो दशम मास में, स्थिर राशि मैं सूर्य
हो तो ज्यारहवें मास में, द्विस्वभाव राशिस्थ सूयं हो तो बारहवें मास में प्रसव होता हे ।
अब चन्द्रमा के संचार से प्रसव का वर्णन--यदि गर्भाघान के समय चन्द्रमा चर राशि में
हो तो दशम मास में, स्थिर राशिगत हो. तो ग्यारहवें मास में, द्विस्वभाव राशि में होने
पर बारहवें मास में प्रसव होता हे ।
अन्य प्रकार से प्रसवज्ञान
गर्भप्रसवविधानं तात्कालिकलग्नवगंतब्चिन्त्यम्‌ ।
३आधानाज्जन्मक्षं दशमं वाञ्छन्ति केचिदार्या:
Translations
English

The matter of delivery can be guessed through the Vargas of Nisheka Lagna. The natal Moon can be in the 10th from Adhana Moon. This view is held by many Acharyas. According to Badarayana the natal Ascendant will be in the 7th from Adhana Lagna and natal Moon will be in the 7th from Adhana Moon. Since there are several views on this, I explain below a view, which is acceptable to all.

Hindi

आधानोदयशशिनोः सप्तमभं बादरायणो ब्रूते । तस्मान्नेकान्तोऽयं सवेषां संमतं वक्ष्ये ।४:॥ गर्भ से प्रसव का ज्ञान गर्भाधान कालिक लग्न के होरादि षड्वगं से करना चाहिये । आधान राशि से दशवीं जन्म राशि होती है ऐसा मत किसी-किसी आचार्य का हूं) बादरायणाचायं का मत है कि आधान लग्न से सप्तम जन्म लग्न, व आधान राशि से सप्तम जन्म राशि होती है । इसलिये इस कथन में मतैक्य न होने के कारण में (ग्रन्थकार) सर्वसम्मत मत को कहता हूँ

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