When the Moon is in a Rasi belonging to Mars, the woman born will be (1) ill-behaved (2) a menial or slave, unchaste (3) virtuous, lofty-minded and prosperous (4) deceitful and (5) frail according as the Trimsamsa of the Moon belongs to (1) Mars, (2) Saturn, (3) Jupiter, (4) Mercury and (5) Venus respectively. When the Moon is in sign Vrishabha or Tula the corresponding effects are: (1) She will be very frail (2) she will resort to a second husband (3) she will be highly respected (4) very intelligent and (5) famous. When the Moon occupies a house of Mercury, the respective effects are: (1) she will be dishonest (2) she will be a eunuch (3) chaste (4) endowed with all good qualities and (5) repining.
यह देखिये कि लग्न और चन्द्रमा दोनों में कौन बलवान है। जो बलवान हो वह यदि — (१) मेष या वृश्चिक राशि में हो — और मंगल के त्रिंशांश में हो तो दुष्टा; शनि के त्रिंशांश में हो तो दासी; गुरु के त्रिंशांश में हो तो सुशीला और धनी; बुध के त्रिंशांश में हो तो मायाविनी; और शुक्र के त्रिंशांश में हो तो चरित्र-दोष से युक्त होती है। (२) वृष या तुला राशि में हो — और मंगल के त्रिंशांश में हो तो बहुत दूषण (चरित्र-दोष) से युक्त; शनि के त्रिंशांश में हो तो अन्य पति से समागम करने वाली (अन्य के पति से, या स्वयं दूसरा विवाह करे); गुरु के त्रिंशांश में हो तो पूज्या (आदरणीया); बुध के त्रिंशांश में हो तो विदुषी; और शुक्र के त्रिंशांश में हो तो प्रसिद्ध-ख्याति वाली हो। (३) यदि मिथुन या कन्या की राशि में हो — और मंगल के त्रिंशांश में हो तो कपटिनी; शनि के त्रिंशांश में हो तो नपुंसक के समान; गुरु के त्रिंशांश में हो तो साध्वी; बुध के त्रिंशांश में हो तो गुणवती; और शुक्र के त्रिंशांश में हो तो विलास के लिये उत्सुक रहे। (४) यदि कर्क राशि में हो — और मंगल के त्रिंशांश में हो तो स्वच्छन्दा; शनि के त्रिंशांश में पति-घातिनी; गुरु के त्रिंशांश में विशिष्ट गुणों से युक्त; बुध के त्रिंशांश में शिल्पकला में कुशल; और शुक्र के त्रिंशांश में उत्तम आचरण वाली होती है। (५) यदि धनु या मीन राशि में हो — और मंगल के त्रिंशांश में हो तो गुणवती; शनि के त्रिंशांश में हो तो सम्भोग की कम इच्छा रखने वाली; गुरु के त्रिंशांश में हो तो गुणशालिनी; बुध के त्रिंशांश में हो तो कला-कुशल; और शुक्र के त्रिंशांश में हो तो सच्चरित्रा होती है। (६) यदि मकर या कुम्भ राशि में हो — और मंगल के त्रिंशांश में हो तो दासी; शनि के त्रिंशांश में हो तो अन्य पुरुष में आसक्त; गुरु के त्रिंशांश में हो तो पति को अपने अधीन रखने वाली; बुध के त्रिंशांश में हो तो असती; और शुक्र के त्रिंशांश में हो तो निस्सन्तान और दरिद्रा होती है। (७) यदि सिंह राशि में हो — और मंगल के त्रिंशांश में हो तो दुष्ट भार्या; शनि के त्रिंशांश में हो तो आचरण-हीन; गुरु के त्रिंशांश में हो तो राजा या ज़मींदार की पत्नी; यदि बुध के त्रिंशांश में हो तो मर्दाना (स्त्रियोचित चेष्टा के विरुद्ध); और शुक्र के त्रिंशांश में हो तो अन्य पुरुष में आसक्त होती है।
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