The following are 4 Rajayogas declared by those versed in the science: (1) malefics posited in the 3rd, 6th and 11th houses reckoned from the one occupied by the lord of the Lagna or of the Janma Rasi; (2) Mars and Mercury occupying the 2nd house from the Lagna; (3) the Sun and Venus situated in the 4th house from the Lagna; and (4) Mars, Saturn and Jupiter quartered in the 10th, 11th and the Lagna.
(क) इस श्लोक में चार राज योग बताये गये हैं। यदि जन्मनाथ से ३, ६ और ११वें स्थान में पाप ग्रह हों। (ख) मंगल और बुध लग्न से दूसरे स्थान में हों। (ग) सूर्य और शुक्र लग्न से चौथे हों। (घ) मंगल, बृहस्पति और शनि क्रमशः दशम में, लग्न में और एकादश में हों तो ये उत्तम राजयोग होते हैं। मूल श्लोक के प्रथम चरण में 'जन्मनाथ' शब्द आया है अर्थात् जन्म-नाथ से। बहुत से लोग इसका अर्थ लग्नेश करते हैं और बहुत से लोगों के मतानुसार जन्मनाथ का अर्थ होता है — जन्म के समय चन्द्रमा जिस राशि में हो उसका स्वामी। हमारे विचार से द्वितीय अर्थ विशेष उपयुक्त है। इस श्लोक का तृतीय चरण है — 'कर्मायलग्नसहिताः कुजमन्दजीवाः'। इसका अर्थ हुआ दशम, एकादश और लग्न में मंगल, शनि, बृहस्पति हों। यद्यपि मूल श्लोक में 'क्रमशः' यह शब्द नहीं है, परन्तु हमारे विचार से मंगल दशम में दिग्बली होता है, बृहस्पति लग्न में दिग्बली होता है और शनि लाभ-स्थान में प्रशस्त माना जाता है। इस कारण १०, ११ और १ में क्रमशः मंगल, शनि और बृहस्पति हों — यह अर्थ विशेष उत्तम होगा।
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