Multiply the Sodhyapinda figure of the Sun's Ashtakavarga by the number of benefic dots in the 8th house from the Sun, and divide the product by 12. When the Sun comes to the Rasi (counted from Mesha) indicated by the remainder, or its triangular sign, the demise of the father should be expected. A wise man should thus fix up with the help of all the other planets the demise in other cases.
सूर्याष्टकवर्ग में जो शोध्यपिण्ड हो उसमें ८ (सूर्य से अष्टम राशि के बिन्दु — होरासार-पाठान्तर) को गुणा कीजिये और जो गुणनफल आवे उसमें १२ का भाग दीजिये। जो शेष बचे उस वाली राशि में (जैसे १ शेष बचे तो मेष, २ शेष बचे तो वृष — इत्यादि) जब सूर्य आवे, या उससे पाँचवीं या नवीं राशि में जब सूर्य गोचरवश आवे — तब पिता की मृत्यु की सम्भावना होती है। वैसे तो प्रतिवर्ष सूर्य उन राशियों में आता है, किन्तु यहाँ अभिप्राय यह है कि जब दशा-अन्तर्दशा-विचार से तथा शनि के गोचर-विचार से पिता की मृत्यु मालूम पड़ती हो — तब उस वर्ष में किस महीने में मृत्यु की सम्भावना है यह देखने के लिये सूर्य का गोचर-फल बताया गया है। जैसे सूर्य के अष्टकवर्ग से पिता का मृत्युकाल निश्चय करने के नियम बताये गये, इसी प्रकार चन्द्रमा के अष्टकवर्ग से माता का, मंगल के अष्टकवर्ग से भाई का — इत्यादि विचार बुद्धिमान् व्यक्ति को करना चाहिये।
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