HomeLibraryPhaladeepikaCh.24Verse 17
Phaladeepika
Chapter 24 · praṣṭakavargaphala · प्रष्टकवर्गफल · Verse 17
Sanskrit · DevanāgarīPhaladeepika manuscript tradition
भवनद्वयशून्ये तु शोधयेदन्यमन्दिरम् ।
समत्वे सर्वगेहेषु सर्वं संशोधयेत्तदा
IAST Transliteration
bhavanadvayaśūnye tu śodhayedanyamandiram | samatve sarvageheṣu sarvaṃ saṃśodhayettadā
TranslationsTwo-source verified
English

If there be no dots in two of the signs of a group, remove the figure in the third. When all the three signs of a group have the same number of dots, remove all.

Hindi

त्रिकोण-शोधन का प्रकार बताया जाता है। (१) मेष, सिंह, धनु एक त्रिकोण; (२) वृष, कन्या, मकर दूसरा त्रिकोण; (३) मिथुन, तुला, कुम्भ तीसरा त्रिकोण; (४) कर्क, वृश्चिक, मीन चौथा त्रिकोण। प्रत्येक अष्टकवर्ग का अलग-अलग त्रिकोण-शोधन होता है। उदाहरण के लिये सूर्याष्टकवर्ग में मेष में ३, सिंह में ५, धनु में ४ बिन्दु हैं — इन तीनों में सबसे कम संख्या ३ है। **प्रथम मत (पराशर):** उस न्यून संख्या को त्रिकोण की अन्य दो राशियों में से अलग-अलग घटाकर शेष को स्थापित करे — मेष में ३−३=०, सिंह में ५−३=२, धनु में ४−३=१। **दूसरा मत (बलभद्र, होरारत्न):** त्रिकोण की तीनों राशियों में उतनी ही (न्यून) संख्या स्थापित करे — मेष में ३, सिंह में ३, धनु में ३। मन्त्रेश्वर ने वही संस्कृत शब्द दिये हैं जो पराशर एवं बलभद्र के ग्रन्थों में हैं — दोनों अर्थ सम्भव हैं। नियम: (क) यदि त्रिकोण की एक राशि में शून्य हो तो अन्य दो राशियों में शोधन-योग्य घटाव-संख्या ० होने से कोई परिवर्तन नहीं। (ख) यदि दो राशियों में शून्य हो तो तीसरी राशि का भी शोधन (शून्य स्थापित) करें। (ग) यदि तीनों में समान संख्या हो तो तीनों में ० स्थापित करें। जातक-पारिजात (अध्याय १० श्लोक ३८) तथा प्रश्न-मार्ग के मत भी ओझा ने उद्धृत किये हैं।

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